Wednesday, May 9, 2012

मृत्यु - स्वयं पद प्रदर्शक !



(चित्र: फ्रीडा काहलो - मेरी मनपसंद चित्रकारों में से)  




पुन: मृत्यु प्रतीक्षा में,
एकमात्र खोज करती - स्वयं,
जीवन अस्तित्व में स्थिर 
आगमन वास्तविकता का - 
पद प्रदर्शक का रूप धारण किये | 


मृत्यु अपने प्रयोजन की - 
खामोश मार्ग दर्शक बन,
मेरे भीतर अपनी दराँती की चमक,
प्रकाशित करती - बनके विश्वात्मा |


परन्तु ये अटल प्रेत - अपरिचित,
समय के मोनोक्रोम से,
जो है संभवतः - मेरा भाग्यविधाता,
और मृत्यु की प्राणहर झंकार,
गुंजायमान - जीवन प्रक्रिया के परिमाण पर |















2 comments:

navin rangiyal said...

सुन्दर है मृत्यु की तरह ...

Saumya said...

dhanyawad Navin ji...mrityu wakai sundar hoti hai kyunki uske baad hi to jivan chakr shuru hota hai :)